हमराही

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Wednesday, August 17, 2016

रक्षाबंधन [दोहावली]


छुट्टी ले भाई गया ,राखी का त्यौहार 
भाई बहना हैं मिले, निश्चल पावन प्यार |

कैसे भला निभा सके, राखी का त्यौहार 
छूट गई है नौकरी ,महँगाई की मार |

राखी का त्यौहार है, सजे हुए बाजार 
बहना धागा बाँधती ,भाई करे दुलार ||

रंग बिरंगी राखियाँ ,कहती सदा पुकार 
कच्चे धागों में बंधा ,निश्चल पावन प्यार ||

रेशम की ले डोरियाँ, बहना बाँधे प्यार 
करती भाई को तिलक, राखी का त्यौहार |

कच्चा धागा प्रेम का ,लाया पक्की प्रीत 
टीका करती है बहन ,वीर निभाना रीत | 

निश्चल पावन भावना ,नेह भरी है डोर 
रक्षा करता बहन की ,मनवा नाचे मोर |
9 अगस्त, 2014.

Saturday, August 13, 2016

सावन दोहे

भीगा भीगा है समय,पहली है बरसात।
मानसून लो आ गया ,भीगे हैं जज्बात।।


सारी धरती खिल उठी ,खुश है आज विशेष 
सावन की बौछार से ,रहा नहीं दुख शेष ||

चमक दामिनी देखती ,धरती का क्या हाल 
सूखा कुछ अब ना रहा , बरखा किया निहाल ||

अन्नदाता किसान के, नैनों में थी पीर  
माल पुए के संग में ,बनी आज है खीर ||


आया सावन झूम के, नम है आज बयार
धरती का आँचल खिला,मिला उसे विस्तार ||

सावन देखो आ गया, लेकर शीतल भोर |
आँचल वसुधा का खिला ,हरियाली चहुँ ओर||
6अगस्त, 2016.

Saturday, August 6, 2016

अच्छा लगता है [ गजल ]

1222         1222    1222
यूँ तेरा मुस्कुराना अच्छा लगता है 

झुकी नजरें चुराना अच्छा लगता है

दिलों को जीतना फितरत सही मेरी  

क्यों तुमसे हार जाना अच्छा लगता है


भरा दामन है मेरा काँटों से लेकिन 

सुमन सा मुस्कराना अच्छा लगता है 

तू वादे तोड़ दे यह तेरी है मर्जी

मुझे वादे निभाना अच्छा लगता है

न भाये छाँव भी महलों की तेरे बिन 

मुझे दिल आशियाना अच्छा लगता है 



हो मेरी जान तुम रूठो नहीं दोस्तो
न यह तुम बिन ज़माना अच्छा लगता है 
6 अगस्त, 2016.

Wednesday, August 3, 2016

रिश्ते हैं सब नाम के [दोहावली]


पति पत्नी यूँ आजकल, करते हैं गुड फील।
रिश्ते हैं सब नाम के, होती केवल डील।।

बेटा कहता बाप से ,फ्यूचर मेरा डार्क। 
रास न आये इण्डिया ,जाना है न्यूयार्क।।

बेटी कहती माँ सुनो,तुम तो रही गँवार।
पढ़ लिख कर हम क्यों भला ,समय करें बेकार।।

मात पिता देते सदा,जिनको आशीर्वाद।
वृद्धाश्रम वो भेजती ,नालायक औलाद।।

छः बच्चे भी पालकर, करते थे तब राज।
एक एक बच्चा अभी ,माँ बाप मोहताज।।
5 जुलाई,2016..

Friday, July 29, 2016

सूखा आषाढ़ दोहे

ईश्वर की लीला अगम , कैसा यह आषाढ़ 
सूखा देखा है कहीं, और कहीं है बाढ़ |१|

सूखा बीता जेठ है, सूखा है आषाढ़ 
हलधर चाहे मेघ से ,रहम नेह की बाढ़ |२|

मेघा दिखते ना कहीं, तक तक सूखे नैन 
सूरज छुप जा तू कहीं, मिले ह्रदय को चैन |३|

हरियाली गायब हुई , गायब है बौछार 
मोर नहीं है नाचता, कृषक बैठा हार |४|

छलनी सीना जेठ ने ,किया धरा को चीर  
भूमिपुत्र है सोचता, कौन हरेगा पीर |५|

सोंधी सोंधी महक से, माटी महके आज 
बिन मेघा के नेह के, कैसे उगे अनाज |६|

निद्रा से उठे मेघ हैं, टूटी लम्बी तान 
सारी धरती खिल उठी ,तृप्त हुई कर पान |७|

घनन घनन बदरा घिरे, ऋतु रानी जब आय 
हरियाली की ओढ़नी , पहन धरा मुसकाय|८|

कजरारे घन देख के, झूम उठा किसान 
भर भर घट खाली करो, खूब उगेगी धान |९|

घन की गगरी है भरी, देख किसान प्रसन्न 
मेघों की बूँदें लगें, ज्यों हो बरसा अन्न |१०|

पींगें हैं सजने लगी, गूंज उठे मल्हार 
इंतजार गोरी करे ,कर सोलह शृंगार |११|

नैना तरसे हैं सजन, ह्रदय हुआ बेचैन 
सावन बीता जा रहा, आ जा तर कर नैन |१२|

Thursday, July 21, 2016

उपहार

उपहार 
अनमोल होते हैं 
अगर दिल से दिये जायें 

उपहार 
हर उम्र में 
सचमुच कितने अच्छे लगते हैं 

उपहार 
बचपन में पाकर 
मन पतंग सा उड़ने लगता है 

उपहार
में दी तुमने 
वो सारी खुशियाँ 
वो अनमोल पल 
जो जिये हमने साथ साथ 
जिनसे महक उठी मेरी जीवन बगिया 

उपहार 
में दे दो अब मुझे 
अपने सारे गम 
ताकि जी सकूँ उनको 
फिर से तुम्हारे साथ
अब जिंदगी की शाम में   

उपहार 
में दे दो मुझे 
अपना अटूट विश्वास 
अपना साथ जिंदगी भर के लिए 
.........................................
         21 जनवरी,2015.सरू 

Sunday, July 10, 2016

फिर चले आना [ गजल ]

1222        1222        1222       1222
गिले शिकवे सभी से अब मिटा लो फिर चले आना 
जरा तुम प्यार अपनों से जता लो फिर चले आना  

न जाने कब तलक यह रात होगी जिंदगी में अब 
दिया इक आस का तुम जो जगा लो फिर चले आना 

अभी गम के अँधेरे दूर तक हैं जिंदगी में यूँ 
गमों के ये अँधेरे तुम मिटा लो फिर चले आना 


सुखों के साथ होंगें जिंदगी में दुख बहुत यारो 
जरा मजबूत कन्धा तुम बना लो फिर चले आना 

अभी टूटे हैं सारे ख़्वाब मिलने के तुम्ही से यूँ 
वो ख्वाबे आशियाना तुम सजा लो फिर चले आना 


फिजाओं में घुला सरिता जहर फिर नफरतों का है

फिजाओं में यूँ खुशियाँ कुछ बसा लो फिर चले आना 

मिली सागर में सरिता प्यास बाकी रह गई फिर भी 
लबों/ह्रदय की तिश्नगी तुम जो बुझा लो फिर चले आना 
10 जुलाई,2016.. सरू