हमराही

सुस्वागतम ! अपना बहुमूल्य समय निकाल कर अपनी राय अवश्य रखें पक्ष में या विपक्ष में ,धन्यवाद !!!!

Friday, May 31, 2013

ब्लॉग महिमा

'ब्लॉग प्रसारण' की ऐसी हुई शुभ शुरुआत  
नए नए ब्लॉग नित 'ब्लोगिंग दुनिया' में आत| 

नया है सबका रूप जो सबके मन को मोहे 
कोई सीख रहा गजल 'र कोई सीख रहा दोहे |

'अरुण शर्मा अनन्त' ने सबसे मित्रता निभाई 
सबको ही कम समय में बहुत चीजें हैं सिखाई |

नए नए नित दोस्त बनें अब नहीं रहा कोई गैर 
सबसे ही करलो दोस्ती ना करो किसी से वैर |

'गुज़ारिश' सुनी सबकी ब्लॉग प्रसारण बनाकर 
आप भी जुड़ें इससे 'दास्ताने दिल' बताकर |

सबके ही आशीर्वाद से आप नए मुकाम पाएँ 
ब्लॉग प्रसारण की अरुण ढेरों शुभकामनाएँ || 

Thursday, May 30, 2013

सूचना

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड 

10 वीं का परीक्षा परिणाम आज घोषित हो गया है 

अपना परिणाम जानने के लिए नीचे क्लिक करें 

स्कूल विद्द्यार्थी यहाँ क्लिक करें 

प्राइवेट विद्द्यार्थी यहाँ क्लिक करे 

या 

आप यहाँ क्लिक करें 

Wednesday, May 22, 2013

अनुभूति तुम्हारे प्यार की



कह सकती हूँ अकेले ,
पर बाँट सकती हूँ,तुम्हारे संग |

मुस्करा सकती हूँ अकेले ,
पर हंस सकती हूँ तुम्हारे संग |

आनंद ले सकती हूँ अकेले ,
पर जश्न मना सकती हूँ तुम्हारे संग | 

यही है सुन्दरता हमारे रिश्ते की ,
हम एक दूसरे बिन कुछ भी नहीं |


Monday, May 20, 2013

चंदरशेखर को श्रद्दांजलि


कुछ पंक्तियाँ पढ़िए बाकी सुनिए 

मन तो मेरा भी करता है झूमूँ , नाचूँ, गाऊँ मैं
आजादी की स्वर्ण-जयंती वाले गीत सुनाऊँ मैं
लेकिन सरगम वाला वातावरण कहाँ से लाऊँ मैं
मेघ-मल्हारों वाला अन्तयकरण कहाँ से लाऊँ मैं

मैं दामन में दर्द तुम्हारे, अपने लेकर बैठा हूँ
आजादी के टूटे-फूटे सपने लेकर बैठा हूँ
घाव जिन्होंने भारत माता को गहरे दे रक्खे हैं
उन लोगों को जैड सुरक्षा के पहरे दे रक्खे हैं
जो भारत को बरबादी की हद तक लाने वाले हैं
वे ही स्वर्ण-जयंती का पैगाम सुनाने वाले हैं

आज़ादी लाने वालों का तिरस्कार तड़पाता है
बलिदानी-गाथा पर थूका, बार-बार तड़पाता है
क्रांतिकारियों की बलिवेदी जिससे गौरव पाती है
आज़ादी में उस शेखर को भी गाली दी जाती है
राजमहल के अन्दर ऐरे- गैरे तनकर बैठे हैं
बुद्धिमान सब गाँधी जी के बन्दर बनकर बैठे हैं

जो धरती में मस्तक बोकर चले गये
दाग़ गुलामी वाला धोकर चले गये
मैं उनकी पूजा की खातिर जीवन भर गा सकता हूँ |
मैं पीड़ा की चीखों में संगीत नहीं ला सकता हूँ | |

डॉक्टर हरिओम पंवार 
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Sunday, May 19, 2013

दमा दम मस्त कलंदर

आनंद लेना हरेक के बस का नहीं 
पर 
आप 
रविवार का आनंद लीजिए 
एक दम मस्त होकर 

Sunday, May 12, 2013

माँ ,मेरी पहचान हो तुम




माँ के आँचल की छाँव में सकूं मिलता है,
बगीचा मेरा इस अनमोल फूल से खिलता है!

ममता और प्यार का अहसास हो तुम,
टूटे हुए दिलों के लिए आस हो तुम!

मेरी पूजा अर्चना मेरा विश्वास हो तुम 
शायद इसीलिए इतनी ख़ास हो तुम!



मेरे घर मंदिर की मूरत हो तुम 
ईश्वर की छवि की सूरत हो तुम!


त्याग ममता अपनापन हैं जेवर तेरे,
गिन ना सकूँ इतने हैं बलिदान तेरे!

मेरी जान ,मेरी पहचान हो तुम,
भगवान का भेजा पैगाम हो तुम!

Friday, May 10, 2013

जिंदा रहने के लिए तेरी कसम

इक मुलाकात जरुरी है सनम 
सांस आती है सांस जाती है..
सिर्फ मुझको है इंतज़ार तेरा 


Sunday, May 5, 2013